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सागर. डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के ललित कला एवं प्रदर्शनकारी कला विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है जिसका विषय है- प्रदर्शनकारी कला एवं ललितकला : समकालीन विमर्श, प्रवृत्तियां एवं नवाचार है. संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र विश्वविद्यालय के अभिमंच सभागार में आयोजित किया जा रहा है जिसमें देश की ख्यातिलब्ध रंगनिर्देशक, रंग चिंतक एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व निदेशक प्रो. देवेन्द्र राज अंकुर एवं ख्यातिलब्ध चित्रकार एवं उ. प्र. राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील विश्वकर्मा उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वाविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता करेंगी.
विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता डॉ. बलवंत सिंह भदौरिया ने बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के दो दिनों के चार सत्रों में कलाओं में समसामयिक विमर्श, प्रवृत्तियां एवं नवाचार विषय पर चर्चा होगी. जिसमें देश भर के लगभग 40 प्रतिभागी एवं स्थानीय लगभग 80 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे. सेमिनार के समापन समारोह में प्रदर्शनकारी कला विभाग के छात्र गिरीश करनाड द्वारा लिखित नाटक हयवदन एवं नृत्य तथा विभोर बैंड की प्रस्तुति भी होगी.
राष्ट्रीय संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. नीरज उपाध्याय ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाली इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के अलग-अलग राज्यों से रंगकर्मियों, रंगचिंतको, एवं कलाकर्मियों का व्याख्यान होगा जिनमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के एसोसिएट प्रो. राम जी बाली, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, वाराणसी केन्द्र के निदेशक श्री प्रवीण कुमार गुंजन, महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वाविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र के रंगमंच विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ सतीश पावडे, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वाविद्यालय के रंगमंच विभागध्यक्ष डॉ हिमांशु द्विवेदी, दिल्ली विश्वाविद्यालय के एसोसिएट प्रो. डॉ आशुतोष, इग्नू नई दिल्ली के ललित कला विभाग के अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मण प्रसाद, प्रख्यात कला समीक्षक जयंत तोमर एवं सुमन कुमार सिंह, साँची विश्वाविद्यालय से डॉ सुष्मिता नंदी, बुंदेलखंड विश्वाविद्यालय झाँसी से डॉ श्वेता पाण्डेय, प्रख्यात सेरेमिक कलाकार सुश्री कोपल सेठ इत्यादि प्रमुख हैं.
उक्त राष्ट्रीय संगोष्ठी का ब्रोशर एवं पोस्टर जारी करते हुए विश्वाविद्यालय की कुलगुरु प्रो. नीलिमा गुप्ता ने सफल कार्यक्रम हेतु शुभकामनायें दीं.
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