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राज्य को तरक्की की बुलंदियों तक पहुंचाएंगे युवा कर्मयोगी- Sanjeev Chopra

 

Uttarakhand @25 : राज्य को तरक्की की बुलंदियों तक पहुंचाएंगे युवा कर्मयोगी, संजीव चोपड़ा के लेख में पढ़ें इतिहास-भविष्य का विश्लेषण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 18 Jul 2022 11:42 AM IST
सार

अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन कर्मयोगी को देश के समक्ष रखा था। उन्होंने  ‘कर्मसु कौशलम’ की बात कही थी। इसे गीता के दूसरे अध्याय के 50 वें श्लोक से लिया गया है। इसका अर्थ है कर्मों में कुशलता। कर्मयोगी पहल के लिए देश भर से प्रशिक्षक और संसाधन जुटाकर  राज्य की कार्य संस्कृति का कायाकल्प करने की खातिर ऐसा करना आवश्यक है।

लेखक संजीव चोपड़ा
लेखक संजीव चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपने स्तंभ की पिछली किस्त मैंने इस बिंदु पर समाप्त की थी  कि उत्तराखंड में मिशन कर्मयोगी को उसकी आत्मा के मुताबिक जस का तस लागू किया जाना चाहिए। मेरे लिए यह बड़े संतोष की बात है कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा डा. आरएस टोलिया नैनीताल एटीआई के सौंपा जाए। वास्तव में सरकार को इस काम में मसूरी स्थित नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की मदद भी लेनी चाहिए।



कर्मयोगी पहल के लिए देश भर से प्रशिक्षक और संसाधन जुटाकर  राज्य की कार्य संस्कृति का कायाकल्प करने की खातिर ऐसा करना आवश्यक है। यही नहीं, इंडस्ट्री, निजी विश्वविद्यालयों और नागरिक संगठनों से अपील की जानी चाहिए वे अपने संसाधनों और विशेषज्ञता को उत्तराखंड के मिशन कर्मयोगी के लिए प्रस्तुत करें ताकि एक दिन ऐसा आए कि राज्य का यह मिशन दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बनकर उभरे और साथ ही उसका प्रसार जिला पंचायतों और नगर निगमों तक किया जा सके।
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