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Doctor's Day: कोविड-19 से लड़ाई में सूरमा साबित हुए सफेद कोट वाले, लेकिन इस बात की है टीस, पढ़ें ये खास लेख

 न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 01 Jul 2022 04:14 PM IST

सार

2022 की डॉक्टर्स डे की थीम ‘सफेद कोट में नायक’ इस तरह से भी पढ़ी जा सकती है... ‘सफेद कोट में नायिका’ ताकि पुरुष डॉक्टरों में चेतावनी और स्पर्धा का एहसास हो। वो भी जन स्वास्थ्य के रोल मॉडल बनने में अपनी ली हुई शपथ निभा सकें।

नेशनल डॉक्टर्स डे
नेशनल डॉक्टर्स डे - फोटो : amar ujala

विस्तार

‘सफेद कोट में नायक’ 2022 की डॉक्टर्स डे की थीम है। यह सच है कि कोविड-19 से लड़ाई में सफेद कोट वाले सूरमा साबित हुए हैं, लेकिन टीस इस बात की भी है कि भारत में सफेद कोट के ये नायक रोल मॉडल या प्रेरणास्रोत बनने की दौड़ में अभी भी काफी पीछे छूटे हुए हैं।


एक अनुमान के अनुसार, भारत में 50 लाख लोग प्रतिवर्ष चिकित्सकीय लापरवाहियों की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। अमेरिका में यह आंकड़ा महज चार लाख है। प्रशिक्षण और सलूक की कमी को इसके लिए जिम्मेदार माना गया है। हालांकि, इस अवांछित मृत्युदर को घटाना सीधे-सीधे डॉक्टरों के हाथ में नहीं है। इसके लिए जरूरी बजट खर्च, प्रशिक्षण में विशेषज्ञता और उत्कृष्टता लाने की जरूरत होगी।


उस खाई को पाटने की जरूरत भी होगी जो 14 लाख डॉक्टरों की कमी से बनी है। हमारे देश में सात हजार लोगों पर एक डॉक्टर है। मौलिक तौर पर ऐसा माना जाता है कि चिकित्सक अपने व्यवहार या व्यवहार में बदलाव लाकर भी समाज की स्वास्थ्य रक्षा कर सकते हैं।

डॉक्टर  उपाधि असल में डॉक्टरों पर उधार है, कोई खालिस उपहार नहीं। डॉक्टर उपाधि को धारण करने वाले व्यक्तियों के आचार-व्यवहार को समाज में ऊंची नजर से देखे जाने का चलन रहा है। जाहिर है कि ऐसे व्यक्तियों का आचरण रोल मॉडल की तरह लिया जाता है। gvnews

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