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नगर पालिका मकरोनिया शपथ ग्रहण समारोह




सागर से सुधीर द्विवेदी की रिपोर्ट

मकरोनिया नगर पालिका परिषद का विधिवत गठन आखिर सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह के साथ शुरू हो गया। समारोह में परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ पार्षदों ने पद के उत्तरदायित्व की शपथ ली। हालांकि इस कार्यक्रम के दौरान कुछ मुद्दे ऐसे रहे जो चर्चाओं में हैं। माना जा रहा है कि यहां पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो नहीं दी गई।
 बात करते हैं मकरोनिया नगर पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष उपाध्यक्ष और पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह की। नगर पालिका कार्यालय के समीप स्थित शासकीय हाई स्कूल में आयोजन सोमवार की सुबह 11 बजे शुरू होना था लेकिन इसका प्रारंभ हुआ दोपहर करीब 1 बजे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नरयावली विधायक समेत अधिकांश पार्षद गण समारोह स्थल पर विलंब से पहुंचे। शुभारंभ संबंधी औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद नपा प्रशासक सपना त्रिपाठी ने सभी पार्षदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। एक-एक करके चार के समूह में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष समेत सभी 18 वार्डों के पार्षदों ने शपथ ली। शपथ की बात करें तो अधिकांश पार्षदो ने केवल मुंह हिलाने की औपचारिकता पूरी की। इनमें से कुछ शपथ लेने की जगह अपने स्थान पर चुपचाप खड़े रहे। बहरहाल जो भी हो नगर पालिका परिषद मकरोनिया को दूसरे कार्यकाल के लिए भाजपा के नेतृत्व में अध्यक्ष के रूप में मिहीलाल और उपाध्यक्ष के रूप में मीनाक्षी  विजय गौतम को चुना गया है आने वाले 5 वर्षों में नपा क्षेत्र का विकास करने और जन सुविधाओं के विस्तार की जिम्मेदारी अब भाजपा पर है शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने कहा की अब यहां विकास की राजनीति का दौर शुरू होना चाहिए विकास के कार्यों के लिए पैसे की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी विधायक लारिया ने कहा कि उनका अपना अनुभव है की पार्षद के रूप में जनता की सेवा करना अधिक आनंददायक होता है हालांकि इस कार्यक्रम में कुछ ऐसी बातें भी चर्चाओं के केंद्र में रहे  जिन पर विचार किया जाना जरूरी है सच में एक अहम बात यह है की समारोह में नगर पालिका मकरोनिया के निवर्तमान अध्यक्ष और पार्षदों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई जबकि होना यह था कि उन्हें कार्यक्रम के लिए सम्मान पूर्वक ना केवल आमंत्रित किया जाना चाहिए था बल्कि उनके कार्यकाल की उपलब्धियों और कमियों का उल्लेख भी मंच से किया जाना चाहिए था इसके बावजूद किसी भी वक्ता ने ऐसा नहीं किया यही कारण था कि अधिकांश पूर्व पार्षद समारोह से नदारद रहे वही एक बात और यह भी है की नगरी निकाय के गठन के बाद आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के उपरांत राष्ट्रगान किया जाता है लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ ।



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